एटा जनपद से आई ये खबर सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि समाज और सिस्टम के लिए आईना

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एटा जनपद से आई ये खबर सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि समाज और सिस्टम के लिए आईना

Saturday, 17 January 2026 | January 17, 2026 Last Updated 2026-01-17T16:55:52Z
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एटा जनपद से आई ये खबर सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि समाज और सिस्टम के लिए आईना है। एक ऐसा आईना, जिसमें रिश्तों की बेरुखी, मजबूरी की इंतहा और एक मासूम की हिम्मत साफ झलकती है। एटा में एक आठ साल का बच्चा अपनी मां का शव लेकर खुद पोस्टमार्टम कराने जिला मुख्यालय पहुंचा। ये दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें भर आईं।

ये हृदयविदारक मामला जैथरा थाना क्षेत्र के ग्राम नगला धीरज का है। यहां रहने वाली 45 वर्षीय नीलम गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। उनका इलाज एटा के वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज में चल रहा था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मां की मौत के बाद न तो कोई रिश्तेदार साथ आया, न कोई परिजन—बस एक आठ साल का मासूम अपनी मां के शव के पास बैठा रोता रहा।
मासूम ने बताया कि एक साल पहले उसके पिता की भी एचआईवी बीमारी के कारण मौत हो चुकी है। माता-पिता दोनों के जाने के बाद परिवार और रिश्तेदारों ने उससे दूरी बना ली। यहां तक कि मां को कंधा देने वाला भी कोई नहीं मिला। मजबूरी में बच्चे ने खुद हिम्मत जुटाई और मां के शव को लेकर पोस्टमार्टम कराने पहुंच गया।
बच्चे का आरोप है कि उसके चाचा और अन्य परिजन उसकी जायदाद पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन इलाज के दौरान किसी ने एक रुपया तक मदद नहीं की।
मासूम ने बताया कि मां की बीमारी के दौरान वही उनका सहारा बना रहा। फर्रुखाबाद के लोहिया अस्पताल से लेकर कानपुर के हैलेट अस्पताल और दिल्ली तक उसने मां का इलाज कराया। बीते आठ दिनों से एटा मेडिकल कॉलेज में वह श्रवण कुमार की तरह दिन-रात मां की सेवा करता रहा, लेकिन किस्मत ने मां को उससे छीन लिया।
मामले की जानकारी मिलते ही थाना जैथरा प्रभारी रितेश ठाकुर ने हस्तक्षेप किया। पुलिस ने बताया कि मौत बीमारी के कारण हुई है और अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी पुलिस निभाएगी। साथ ही बच्चे को हरसंभव मदद का भरोसा दिया गया है।
अब सवाल ये है कि इस मासूम का भविष्य कौन संवारेगा? क्या समाज और प्रशासन सिर्फ संवेदनाएं जताकर रुक जाएंगे, या इस बच्चे की जिंदगी को नई दिशा मिलेगी।