बदायूं। जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय ने 14 मई 2026 को वर्ष 2014 के एक हत्या मामले में पांच अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
रिपोर्ट हुकुम सिंह तहसील प्रभारी दातागंज
इन अभियुक्तों को अपहरण और साक्ष्य मिटाने के अपराधों में भी अलग-अलग कारावास और अर्थदंड दिया गया है।
यह मामला मूसाझाग थाने में मु0अ0सं0 32/14 के तहत धारा 364 (अपहरण), 302 (हत्या), 149 (गैरकानूनी जमावड़ा) और 201 (साक्ष्य मिटाना) भारतीय दंड संहिता के तहत पंजीकृत किया गया था। इसमें कर्र उर्फ तारीफ सिंह, जागेश, कमलेश, औमान सिंह और कल्लू को आरोपी बनाया गया था। विवेचना उप निरीक्षक रुकमपाल सिंह यादव ने पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था।
उत्तर प्रदेश के महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे "ऑपरेशन कन्विक्शन" अभियान के तहत इस मामले को चिन्हित किया गया था। अभियोजन विभाग के समन्वय से बदायूं की मॉनिटरिंग सेल और पैरोकार आरक्षी विकास वर्मा ने न्यायालय में सशक्त पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप यह दोषसिद्धि हुई।
न्यायालय ने अभियुक्तगण कर्र उर्फ तारीफ सिंह, जागेश, कमलेश, औमान सिंह और कल्लू को धारा 364/149 भादवि के अपराध में 10-10 वर्ष के कारावास और प्रत्येक को 5000-5000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड
[15/05, 8:59 am] Hukum Singh: अदा न करने पर उन्हें 2-2 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
इसके अतिरिक्त, धारा 302/149 भादवि के अपराध में प्रत्येक को आजीवन कारावास और 10000-10000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में 3-3 माह का अतिरिक्त कारावास होगा।
धारा 201/149 भादवि के अपराध में प्रत्येक अभियुक्त को 5-5 वर्ष के कारावास और 3000-3000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड न देने पर 1-1 माह का अतिरिक्त कारावास होगा।
न्यायालय ने आदेश दिया कि अभियुक्तों की सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इस मामले में जेल में बिताई गई अवधि को उपरोक्त सजा में समायोजित किया जाएगा। इस सफल अभियोजन में पैरोकार आरक्षी विकास वर्मा, विवेचक उप निरीक्षक रुकमपाल सिंह और लोक अभियोजक अनिल कुमार राठौर का योगदान सराहनीय रहा।
