बदायूं शरीफ में सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ कंपटीशन का आयोजनलगभग 500 छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा, शहर के साथ गांवों और दूसरे शहरों से भी पहुंचे प्रतिभागी

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बदायूं शरीफ में सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ कंपटीशन का आयोजनलगभग 500 छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा, शहर के साथ गांवों और दूसरे शहरों से भी पहुंचे प्रतिभागी

Tuesday, 8 September 2026 | September 08, 2026 Last Updated 2026-09-08T09:17:24Z
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बदायूं शरीफ में सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ कंपटीशन का आयोजनलगभग 500 छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा, शहर के साथ गांवों और दूसरे शहरों से भी पहुंचे प्रतिभागी

बदायूं शरीफ।
रसूल-ए-अकरम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ की पाकीज़ा सीरत, मुबारक जीवन और आपकी शिक्षाओं से नई पीढ़ी को जोड़ने के उद्देश्य से बदायूं शरीफ में एक भव्य एवं ऐतिहासिक “सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ कंपटीशन” का आयोजन किया गया। यह शानदार कार्यक्रम तहरीक-ए-इस्लाहुल मुस्लिमीन एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट के तत्वावधान में जामिया इमदादिया अस्सुन्निया में आयोजित हुआ।

कंपटीशन में लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता की विशेष बात यह रही कि इसमें केवल बदायूं शहर के छात्र-छात्राएं ही नहीं, बल्कि आसपास के विभिन्न गांवों तथा दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में बच्चे पहुंचे। प्रतिभागियों और उनके अभिभावकों में कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और नौजवानों के दिलों में इश्क-ए-रसूल ﷺ, सीरत-ए-पाक से मोहब्बत तथा नबी-ए-करीम ﷺ की सुन्नतों को अपनी जिंदगी में अपनाने का जज़्बा पैदा करना था। आयोजकों का कहना था कि आज की युवा पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपने प्यारे आका हज़रत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ की मुकद्दस जिंदगी और आपकी शिक्षाओं से परिचित कराना समय की महत्वपूर्ण जरूरत है।

इस विशाल प्रतियोगिता के आयोजन में तहरीक-ए-इस्लाहुल मुस्लिमीन एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट के फाउंडर क़ारी गुलाम दस्तगीर साहब की अहम भूमिका रही। उनकी निगरानी और प्रयासों से इस कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया। प्रतियोगिता की तैयारी, बच्चों की भागीदारी, व्यवस्था तथा आयोजन से जुड़े तमाम मामलों को बेहतर तरीके से अंजाम देने के लिए काफी समय से मेहनत की गई, जिसका शानदार परिणाम कार्यक्रम के रूप में सामने आया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर मौलाना अब्दुल अलीम क़ादरी मजीदी अजहरी तथा मौलाना बदरे आलम क़ादरी अजहरी ने शिरकत की। दोनों सम्मानित उलेमा की मौजूदगी से कार्यक्रम की रौनक और गरिमा में और इज़ाफा हुआ। इसके अलावा उनके करीबी और सहयोगी अहबाब में मौलाना अरबाज, मौलाना सैफ मलिक, मौलाना शादाब, क़ारी इमरान, हाफिज अजहर और हाफिज यामीन सहित अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।

प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ भाग लिया। बच्चों की मेहनत, सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ के बारे में उनकी जानकारी और प्रतियोगिता के प्रति उनका जोश कार्यक्रम में विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। बड़ी संख्या में प्रतिभागियों की मौजूदगी ने यह साबित किया कि अगर बच्चों को दीन और सीरत-ए-रसूल ﷺ से जोड़ने के लिए सही मंच और अवसर दिया जाए तो उनमें इसके प्रति बेहद शानदार रुचि पैदा की जा सकती है।

छात्राओं की निगरानी एवं मार्गदर्शन की जिम्मेदारी आलिमा-फाजिला क़ारिया यशफीन ज़हरा ने निभाई। उन्होंने छात्राओं की व्यवस्था, अनुशासन और प्रतियोगिता से संबंधित आवश्यक निगरानी को बेहतर ढंग से संभाला। छात्राओं की बड़ी संख्या में भागीदारी भी कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

आयोजकों ने बताया कि इस प्रतियोगिता को केवल एक सामान्य प्रतियोगिता के रूप में आयोजित नहीं किया गया, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के अंदर सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ को पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने का शौक पैदा करना है। प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि हज़रत मुहम्मद ﷺ की जिंदगी हमारे लिए हर क्षेत्र में बेहतरीन नमूना है और आपकी सीरत को जानना प्रत्येक मुसलमान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान पूरे आयोजन में धार्मिक, शैक्षणिक और अनुशासनात्मक वातावरण देखने को मिला। बच्चों के साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों की भी मौजूदगी रही। दूर-दराज के गांवों और अन्य शहरों से आए प्रतिभागियों ने आयोजन की व्यापकता को और बढ़ा दिया।

तहरीक-ए-इस्लाहुल मुस्लिमीन एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस विशाल सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ कंपटीशन को बदायूं शरीफ में बच्चों के बीच सीरत-ए-रसूल ﷺ की जानकारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस सफल आयोजन के बाद क्षेत्र के लोगों और अभिभावकों ने आयोजकों की इस पहल की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस तरह के बड़े धार्मिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे।

कार्यक्रम के आयोजकों ने सभी उलेमा-ए-किराम, मेहमानों, शिक्षकों, अभिभावकों, छात्र-छात्राओं और उन तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपना सहयोग दिया।