यूपी की खाद्य प्रसंस्करण नीति से निवेश, रोजगार और निर्यात को नई रफ्तार

Notification

×

All labels

All Category

Iklan

All labels

यूपी की खाद्य प्रसंस्करण नीति से निवेश, रोजगार और निर्यात को नई रफ्तार

Monday, 23 February 2026 | February 23, 2026 Last Updated 2026-02-23T18:07:29Z
    Share
यूपी की खाद्य प्रसंस्करण नीति से निवेश, रोजगार और निर्यात को नई रफ्तार
बदायूँ : 22 फरवरी। उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तेजी से एक प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो रहा है। यूपी की खाद्य प्रसंस्करण नीति से निवेश, रोजगार और निर्यात को नई रफ्तार मिल रही है। प्रदेश सरकार द्वारा लागू उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 का उद्देश्य राज्य में निवेश, रोजगार और निर्यात को प्रोत्साहित करते हुए किसानों की आय में वृद्धि करना है। खाद्य प्रसंस्करण विभाग इस क्षेत्र मे सुदृढ़ नीति एवं पारदर्शी व्यवस्था के साथ आगे बढ़ रहा है।
प्रदेश में असंगठित क्षेत्र के अंतर्गत लगभग 3.50 लाख खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित एवं क्रियाशील हैं, जबकि संगठित क्षेत्र में 80,000 से अधिक इकाइयाँ कार्यरत हैं। इनमें से 3000 से अधिक इकाइयों का वार्षिक टर्नओवर 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक है। यह क्षेत्र लगभग 2.55 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध करा रहा है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक जनपद में 1000 नई इकाइयाँ स्थापित कर 75,000 अतिरिक्त इकाइयों की स्थापना करना है, जिससे कुल संख्या को लगभग 1.40 लाख तक पहुंचाया जा सके। राज्य में 15 एग्रो-फूड प्रोसेसिंग पार्क भी विकसित किए जा रहे हैं।
प्रदेश में निजी निवेश के माध्यम से बड़ी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं, जिनमें छमेजसन्न (ग्रेटर नोएडा), हल्दीराम्स (नोएडा/लखनऊ), च्ंतसम च्तवकनबजे (बहेरी) तथा डवजीमत क्ंपतल (वाराणसी) प्रमुख हैं। हल्दी, आम, आँवला, मिर्च, नमकीन एवं दुग्ध प्रसंस्करण पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का प्रमुख निर्यातक राज्य बनकर उभर रहा है।
नीति के अंतर्गत नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को परियोजना लागत का 35 प्रतिशत (अधिकतम 5 करोड़ रुपये) अनुदान दिया जा रहा है। इकाइयों के विस्तार, आधुनिकीकरण एवं उन्नयन हेतु 35 प्रतिशत (अधिकतम 1 करोड़ रुपये) का प्रावधान है। मूल्य वर्धन एवं कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए प्लांट एवं मशीनरी पर 35 प्रतिशत तथा फ्रीजिंग सुविधा पर 50 प्रतिशत (अधिकतम 10 करोड़ रुपये) तक अनुदान उपलब्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापना पर महिला उद्यमियों को 90 प्रतिशत तथा पुरुष उद्यमियों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। निर्यात हेतु परिवहन लागत पर 25 प्रतिशत सब्सिडी, रेफर वैन/मोबाइल यूनिट के लिए 5 वर्ष तक ब्याज सब्सिडी (अधिकतम 50 लाख रुपये), कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर पर 35 प्रतिशत (अधिकतम 10 करोड़ रुपये) तथा फार्म गेट इंफ्रास्ट्रक्चर पर 35 प्रतिशत (अधिकतम 5 करोड़ रुपये) की सहायता दी जा रही है।
भूमि एवं शुल्क संबंधी प्रोत्साहनों में 12.5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि क्रय की अनुमति, भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट, बाह्य विकास शुल्क में 75 प्रतिशत छूट तथा स्टांप शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। साथ ही एकल एकीकृत बाजार व्यवस्था के अंतर्गत मंडी शुल्क एवं उपकर में छूट प्रदान की जा रही है।
उद्यमी सिंगल विंडो पोर्टल “निवेश मित्र” के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिससे पारदर्शी एवं समयबद्ध स्वीकृति प्रक्रिया सुनिश्चित की गई है। गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा किसानों, उद्यमियों और युवाओं को सशक्त बनाना ही इस नीति का मूल उद्देश्य है। उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 राज्य को आत्मनिर्भर, रोजगारयुक्त और निर्यातोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है।
-----