अधिशासी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति तीन साल में एक भी विकास कार्य नहीं कराया गयाडीएम द्वारा पास की गई कार्ययोजनाओ के बाद भी नहीं पूरी हुई टेंडर प्रक्रिया

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अधिशासी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति तीन साल में एक भी विकास कार्य नहीं कराया गयाडीएम द्वारा पास की गई कार्ययोजनाओ के बाद भी नहीं पूरी हुई टेंडर प्रक्रिया

Friday, 24 July 2026 | July 24, 2026 Last Updated 2026-07-24T11:10:34Z
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खबर का असर स्पष्टीकरण न देने पर चेयरमेन ने शासन से की अधिशासी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुतिस्पष्टीकरण न देने पर चेयरमेन ने शासन से की अधिशासी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति तीन साल में एक भी विकास कार्य नहीं कराया गया
डीएम द्वारा पास की गई कार्ययोजनाओ के बाद भी नहीं पूरी हुई टेंडर प्रक्रिया

शासन ने डीएम को दिए ईओ की जांच के निर्देश, आख्या मांगी
बदायूं। नगर पंचायत अलापुर के अधिशासी अधिकारी त्रिवेन्द्र कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन ने की है। अध्यक्ष द्वारा जारी स्पष्टीकरण नोटिस का निर्धारित अवधि में जवाब न देने, वैधानिक निर्देशों की अवहेलना करने और प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही बरतने के आरोप में यह कदम उठाया गया है।

नगर पंचायत अलापुर के ईओ त्रिवेंद्र कुमार की लापरवाही की वजह से नगर में विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। इन तमाम समस्याओं को उजागर करते हुए जागरण मोर्चा समाचार पत्र ने सभी खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जिसका संज्ञान अब शासन ने ले लिया है। शासन ने डीएम से जांच कर आख्या तलब की है। वही ईओ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष ने भी संस्तुति पत्र शासन को भेजा है। भेजे गए पत्र में बताया है कि नगर पंचायत अध्यक्ष ने 30 जून 2026 को अधिशासी अधिकारी को विस्तृत नोटिस जारी किया था। यह नोटिस स्पीड पोस्ट, ई-मेल और व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजा गया, जिसमें 15 गंभीर प्रशासनिक, वित्तीय और कार्यालयीय अनियमितताओं पर सात कार्यदिवस के भीतर बिंदुवार स्पष्टीकरण मांगा गया था। लेकिन निर्धारित समयावधि बीत जाने के बावजूद अधिशासी अधिकारी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया और न ही समय बढ़ाने का अनुरोध किया गया।

नोटिस में कार्यालय में अनुपस्थिति, विकास कार्यों की निविदा प्रक्रिया में देरी, विभिन्न योजनाओं की डीपीआर समय से तैयार न करना, ठेकों की नीलामी न कराना, आउटसोर्स कर्मियों का वेतन रोकना, ठेकेदारों के भुगतान लंबित रखना और सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण न हटाने जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। इसके अलावा उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन न करने का भी उल्लेख किया गया था।

अध्यक्ष का कहना है कि अधिशासी अधिकारी का यह रवैया प्रशासनिक शिथिलता और कर्तव्यहीनता को दर्शाता है। नोटिस में पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि समय पर जवाब न मिलने की स्थिति में मामला शासन को भेजा जाएगा।

इसी क्रम में अब पूरा प्रकरण निदेशक, स्थानीय निकाय उत्तर प्रदेश शासन को भेजते हुए अधिशासी अधिकारी के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की संस्तुति की गई है। साथ ही शासन स्तर से आवश्यक प्रशासनिक निर्णय लेने का अनुरोध भी किया गया है। निदेशक ने डीएम अवनीश राय को पत्र भेजकर जांच कर आख्या तलब की है। इससे साफ है कि ईओ की लापरवाही के चलते विभागीय कार्रवाई तय है।