मंडी में धान की आवक तेज, खरीद व्यवस्था पर अब भी पेच; लिखित आश्वासन के बिना पंजीकरण नहीं करेंगे कच्चे आढ़ती, 34 राइस मिलर्स ने कस्टम हिलिंग शुरू करने पर जताई सहमति।

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मंडी में धान की आवक तेज, खरीद व्यवस्था पर अब भी पेच; लिखित आश्वासन के बिना पंजीकरण नहीं करेंगे कच्चे आढ़ती, 34 राइस मिलर्स ने कस्टम हिलिंग शुरू करने पर जताई सहमति।

Tuesday, 13 October 2026 | October 13, 2026 Last Updated 2026-10-14T00:29:42Z
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मंडी में धान की आवक तेज, खरीद व्यवस्था पर अब भी पेच; लिखित आश्वासन के बिना पंजीकरण नहीं करेंगे कच्चे आढ़ती, 34 राइस मिलर्स ने कस्टम हिलिंग शुरू करने पर जताई सहमति।


सितारगंज:(चरनसिंह सरारी) खरीफ खरीद सत्र 2026-27 के तहत धान खरीद की तैयारियों के बीच सितारगंज मंडी में व्यवस्थागत अड़चनें सामने आने लगी हैं। एक ओर किसान अपनी उपज लेकर लगातार मंडी पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कच्चे आढ़तियों के माध्यम से धान खरीद शुरू करने को लेकर स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। विभाग और राइस मिलर्स के बीच पंजीकरण की शर्तों को लेकर सहमति नहीं बनने से खरीद व्यवस्था पर असमंजस बना हुआ है। ऐसे में मंडी पहुंच रहे किसानों के सामने अपनी उपज बेचने का इंतजार बढ़ने की आशंका खड़ी हो गई है। कच्चे आढ़तियों ने साफ कर दिया है कि जब तक विभाग उनकी प्रमुख शंकाओं का लिखित समाधान नहीं करता, तब तक पंजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर निर्णय लेना मुश्किल होगा। इसी मुद्दे को लेकर मंडी समिति सितारगंज में राइस मिल एसोसिएशन, कच्चे आढ़तियों और मंडी समिति के वरिष्ठ विपणन अधिकारियों के बीच बैठक आयोजित की गई। बैठक में खरीद व्यवस्था को सुचारु बनाने और पंजीकरण से जुड़ी शर्तों पर विस्तार से चर्चा हुई, लेकिन कच्चे आढ़तियों ने कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग उठाई। उनका कहना है कि खरीद प्रक्रिया में उतरने से पहले यह तय होना जरूरी है कि कस्टम हिलिंग के लिए बैंक गारंटी के सापेक्ष राइस मिलों को कितनी मात्रा में धान उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा कच्चा आढ़ती मद में खरीदे जाने वाले धान पर मंडी शुल्क और विकास सेस जमा करने की जिम्मेदारी किसकी होगी, इस संबंध में भी स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। निर्धारित समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में ब्याज का भुगतान किस स्तर से किया जाएगा, इसे लेकर भी कच्चे आढ़तियों ने विभाग से लिखित आश्वासन मांगा है। आढ़तियों का मानना है कि इन वित्तीय और प्रशासनिक बिंदुओं पर स्पष्टता के बिना पंजीकरण कराना आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए उन्होंने पहले नियमों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने तथा उसके बाद ही पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है। बैठक में पिछले खरीद सत्र से जुड़ा मामला भी प्रमुखता से उठा। कच्चे आढ़तियों ने खरीफ खरीद सत्र 2025-26 के दौरान कच्चा आढ़ती मद में खरीदे गए धान से तैयार चावल के उतार की समयसीमा स्पष्ट करने की मांग की। उनका कहना है कि पिछले सत्र के चावल के उतार को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि मौजूदा खरीद सत्र में पुरानी व्यवस्थाओं और नई जिम्मेदारियों के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे। इन सभी बिंदुओं पर लिखित जानकारी मिलने के बाद ही पंजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर निर्णय लिया जा सकेगा। इधर, 34 राइस मिलर्स ने कस्टम हिलिंग शुरू करने पर जताई सहमति, जिससे खरीद व्यवस्था को आगे बढ़ाने की उम्मीद जरूर बनी है। विभागीय पत्र के अनुसार, पिछले वर्ष पंजीकृत मिलर्स में से 34 ने अगले दिन से कस्टम हिलिंग का काम शुरू करने पर सहमति दी है। हालांकि, कच्चे आढ़तियों की मांगों और पंजीकरण से जुड़ी शर्तों पर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है। बैठक में उठाए गए मुद्दों तथा कच्चे आढ़तियों की मांगों से संबंधित पत्र आवश्यक कार्रवाई के लिए संभागीय खाद्य नियंत्रक, कुमाऊं संभाग, हल्द्वानी को भेजा गया है। अब इस मामले में विभागीय निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। किसानों की बढ़ती आवक के बीच खरीद व्यवस्था का अटकना चिंता का विषय बनता जा रहा है। मंडी में धान लेकर पहुंच रहे किसानों को उम्मीद है कि सरकारी खरीद व्यवस्था जल्द सुचारु होगी और उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लेकिन पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने और खरीद से जुड़ी जिम्मेदारियों पर सहमति नहीं बनने से फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यदि विभाग और संबंधित पक्षों के बीच जल्द सहमति नहीं बनती है तो खरीद प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में विभागीय अधिकारियों के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर कच्चे आढ़तियों की मांगों और शंकाओं का समाधान करना, वहीं दूसरी ओर मंडी में पहुंच रहे किसानों की उपज की खरीद समय पर सुनिश्चित करना। अब सबकी निगाहें संभागीय स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि विभाग कच्चे आढ़तियों की मांगों पर कब तक लिखित स्थिति स्पष्ट करता है और सितारगंज मंडी में धान खरीद व्यवस्था को पूरी तरह सुचारु बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।