सूफी जी के तीन रोज़ा उर्स का कुल से समापन , महफिले मीलाद के साथ हुई तकरीरें

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सूफी जी के तीन रोज़ा उर्स का कुल से समापन , महफिले मीलाद के साथ हुई तकरीरें

Saturday, 31 January 2026 | January 31, 2026 Last Updated 2026-01-31T11:46:43Z
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क्यूँ किसी को दें सदायें आपके होते हुए

सूफी जी के तीन रोज़ा उर्स का कुल से समापन , महफिले मीलाद के साथ हुई तकरीरें 

 फ़ोटो लाईन - सूफी सिब्ते अहमद के उर्स में कलाम पढ़ते मेहमान खतीब

वजीरगंज ( बदायूं ) | हजरत सूफी सिब्ते अहमद साहब के तीन रोज़ा उर्स शरीफ में क़ुरआन ख्वानी महफिले मीलाद के बाद शुक्रवार को कुल की फातिहा के साथ समापन किया गया । समस्त कार्यक्रम की सरपरस्ती व सदारत खलीफए मियाँ हुज़ूर हज़रत अनवर मियां व निजामत नौजवान शायर डॉ हिलाल बदायूनी ने फरमाई |

 उर्स शरीफ में आयोजित जलसे में गजरौला से आये अल्लामा मौलाना इदरीस रज़ा बरकाती ने कहा की तालीम इंसान की तरक़्क़ी के लिए बेहद ज़रूरी है । तालीम से ही इंसान को इंसानियत का शऊर आता है । खानकाह आलिया कादरिया मुहम्मदिया बरेली से आये मियां हुज़ूर ने अदब के मक़ाम के बारे में बताया और कहा 
हमारे आपके नबी वो हैं जिनकी सीरत भी खूबसूरत है सूरत भी खूबसूरत है जिनका किरदार भी खूबसूरत है गुफ्तार भी खूबसूरत है ।हाफ़िज़ ज़ीशान ने कहा अगर कोई सिलसिला होता है तो उसे फैज़ हज़रत अली के दर का मिलता है । सूफी जी का हाथ हज़रत वली के हाथ में है और हज़रत वली का हाथ हज़रत अली के हाथ में है । 

निजामत कर रहे शायर हिलाल बदायूँनी ने कहा 
क्यूँ कहीं पर सर झुकायें आपके होते हुए
क्यूँ किसी को दें सदायें आपके होते हुए
मनकबत के लफ्ज़ सारे आप ही के नाम हैं
क्यूँ किसी के गीत गायें आपके होते हुए


हाफ़िज़ ज़ियाउल साबरी ने कहा 
अब और न ग़ुलाम को तड़पाइये हुज़ूर
महफ़िल सजी हुई है चले आइए हुज़ूर 
 
हाफ़िज़ रिज़वान रज़ा ने कहा
ये दिल भी हुसैनी है ये जान हुसैनी है ।
हम सुन्नी मुसलमाँ हैं ईमान हुसैनी है ।

शक्रवार बाद नमाज़ जुमा सूफी जी के मज़ार पर नगर से होता हुआ चादरों का जुलूस पहुंचाया गया एवं अंत मे तक़रीर व दुआओं के साथ उर्स का समापन हुआ | कार्यक्रम के मेहमाने खुसूसी खालिफए मियां हुज़ूर अनवर मियां ने कुल की फातिहा के बाद मुल्क में अमन चैन व हाजरीन के लिए मखसूस दुआ फरमाई | महफ़िल मे हाफ़िज़ अबरार अहमद हाफ़िज़ इरशाद सूफी ज़रीफ़ अहमद हाफ़िज़ दानिश सरफराज साजिद नन्ने बाबू सलीम मुश्फिक गयूर असलम मोअज़्ज़िन हाफ़िज़ हनीफ आदि ने अपना अपना कलाम पेश किया | कुल शरीफ की फातिहा के तबर्रुकात एवं लंगर तकसीम किया गया | इस मौके पर उमर कुरेशी डा गुच्छन इरफ़ान मुहम्मद साजिद सैफ़ी पप्पू मसूदी साबिर नूर मो नबी ड्राइवर मुस्तकीम टीटी ज़हीर मंसूरी मुज़फ्फर सादुल्ला मंसूरी मुशाहिद यासीन सैफी मा खलील अहमद हुसैन मुन्तेयाज़ अलीमुहम्मद मसूदी इंतज़ार मसूदी ज़ाकिर जमील असगर सुलेमान असरार सलमानी समेत सैकड़ो लोग मौजूद रहे | उर्स शरीफ के समापन पर सूफी साहब के साहबजादगान क़मरुज़्ज़मा शम्सुज्ज़मा व रफ़ीउज्ज़मा एडवोकेट ने सभी का आभार व्यक्त किया ||