रामपुर: सपा में बढ़ी अंदरूनी कलह, नगर अध्यक्ष आसिम राजा ने सांसद पर साधा निशाना

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रामपुर: सपा में बढ़ी अंदरूनी कलह, नगर अध्यक्ष आसिम राजा ने सांसद पर साधा निशाना

Tuesday, 4 August 2026 | August 04, 2026 Last Updated 2026-08-05T01:55:38Z
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रामपुर: सपा में बढ़ी अंदरूनी कलह, नगर अध्यक्ष आसिम राजा ने सांसद पर साधा निशाना

रामपुर। समाजवादी पार्टी में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। टांडा क्षेत्र के तीन नेताओं को पार्टी में शामिल कराए जाने को लेकर सपा नगर अध्यक्ष आसिम राजा और जिला अध्यक्ष अजय सागर ने कड़ी आपत्ति जताई है। दोनों नेताओं ने प्रेसवार्ता कर इस प्रक्रिया को पार्टी की गाइडलाइन के खिलाफ बताते हुए इसकी निंदा की

आसिम राजा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में नए लोगों को शामिल करने की एक निर्धारित संगठनात्मक प्रक्रिया होती है। पार्टी में शामिल किए गए तीनों नेता पहले समाजवादी पार्टी और उसकी विचारधारा के विरोध में रहे हैं तथा चुनावों में भी पार्टी प्रत्याशियों का विरोध कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों को पार्टी में शामिल करने से संगठन मजबूत नहीं बल्कि कमजोर होगा और कार्यकर्ताओं में बिखराव पैदा होगा

उन्होंने कहा कि पार्टी में सदस्यता दिलाने का अधिकार संगठन और जिला अध्यक्ष का होता है, जबकि सांसद का दायित्व अलग है। उनका कहना था कि सांसद को संगठन के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। आसिम राजा ने यह भी कहा कि स्वार-टांडा क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति और वहां के नेताओं की भूमिका को सबसे बेहतर पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान और स्थानीय संगठन ही जानते हैं

आसिम राजा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग करते हुए कहा कि पार्टी विरोधी और आजम खान के विरोध में काम करने वाले लोगों को संगठन में शामिल करना समाजवादी पार्टी की जड़ों को कमजोर करने वाला कदम है। उन्होंने चेतावनी दी कि रामपुर में समानांतर संगठन खड़ा करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी

वहीं सपा के जिला अध्यक्ष अजय सागर ने कहा कि उनका किसी व्यक्ति विशेष से विरोध नहीं है, लेकिन पार्टी की गाइडलाइन का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रक्रिया के तहत लोगों की सदस्यता होनी चाहिए थी, उसका पालन नहीं किया गया। संगठन का काम संगठन को ही करना चाहिए और इसी कारण वे इस तरीके का विरोध कर रहे हैं

इस घटनाक्रम के बाद रामपुर में समाजवादी पार्टी के भीतर संगठन और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर विवाद खुलकर सामने आ गया है। अब सबकी निगाहें पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं