रामपुर: झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, CMO बोलीं- 42 एफआईआर, 50 से अधिक सेंटर बंद

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रामपुर: झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, CMO बोलीं- 42 एफआईआर, 50 से अधिक सेंटर बंद

Tuesday, 4 August 2026 | August 04, 2026 Last Updated 2026-08-05T01:54:32Z
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रामपुर: झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, CMO बोलीं- 42 एफआईआर, 50 से अधिक सेंटर बंद

रामपुर। जनपद में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. दीपा सिंह ने बताया कि उनके कार्यकाल में अब तक 42 एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी हैं, जबकि 50 से अधिक अवैध सेंटरों को बंद कराया गया है। इनमें अवैध अस्पताल, क्लीनिक, लैब और अन्य स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं
डॉ. दीपा सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से कार्रवाई कर रहा है। शिकायत मिलने पर तत्काल टीम मौके पर पहुंचती है। समय-समय पर विशेष अभियान भी चलाए जाते हैं। एक अभियान के दौरान आठ टीमें गठित कर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी कराई गई, ताकि सूचना लीक होने से पहले कार्रवाई की जा सके

 उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा के बाद फिर से इसी तरह का व्यापक अभियान चलाने की तैयारी है। फिलहाल भी दो से तीन टीमें नियमित रूप से सक्रिय हैं और जरूरत पड़ने पर देर रात तक कार्रवाई करती हैं

CMO ने कहा कि कार्रवाई के बावजूद कुछ झोलाछाप डॉक्टर एक जगह सील होने के बाद दूसरी जगह अपना सेंटर खोल लेते हैं। कई ऐसे लोग हैं जिनके दो-दो और तीन-तीन सेंटर बंद कराए जा चुके हैं, लेकिन वे फिर भी अवैध रूप से मरीजों का इलाज शुरू कर देते हैं। कोर्ट में मामलों के लंबित रहने और जमानत मिलने का भी कुछ लोग फायदा उठाते हैं

उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि लोग अपनी जान जोखिम में डालकर अप्रशिक्षित और बिना डिग्री वाले लोगों से इलाज न कराएं। यदि निजी अस्पताल का खर्च वहन करना संभव नहीं है तो सरकारी अस्पतालों और निकट के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उपलब्ध निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लें। उन्होंने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तैनात सीएचओ वीडियो कॉल के माध्यम से मरीज की विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श कराते हैं और आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं

डॉ. दीपा सिंह ने कहा कि लोगों को जागरूक होकर केवल योग्य और पंजीकृत चिकित्सकों से ही इलाज कराना चाहिए, ताकि झोलाछाप डॉक्टरों के कारण होने वाली गंभीर घटनाओं से बचा जा सके