मानदेय की मांग को लेकर धरने पर बैठीं आशा संगिनियां, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का दावाबदायूं में उत्तर प्रदेश आशा संगिनी वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष सुधा रानी के नेतृत्व में आशा कार्यकर्ताओं

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मानदेय की मांग को लेकर धरने पर बैठीं आशा संगिनियां, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का दावाबदायूं में उत्तर प्रदेश आशा संगिनी वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष सुधा रानी के नेतृत्व में आशा कार्यकर्ताओं

Friday, 9 October 2026 | October 09, 2026 Last Updated 2026-10-10T02:21:25Z
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मानदेय की मांग को लेकर धरने पर बैठीं आशा संगिनियां, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का दावा
बदायूं में उत्तर प्रदेश आशा संगिनी वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष सुधा रानी के नेतृत्व में आशा कार्यकर्ताओं और संगिनियों ने मानदेय वृद्धि समेत विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता और सीएमओ को ज्ञापन सौंपकर 26 हजार रुपये मासिक मानदेय, राज्य कर्मचारी का दर्जा, बढ़ा हुआ विजिट भत्ता, स्मार्टफो
मानदेय बढ़ाने और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर बदायूं में ज्ञापन सौंपतीं आशा कार्यकर्ता एवं संगिनियां। 
21 से 26 हजार रुपये मानदेय, राज्य कर्मचारी का दर्जा और बीमा सहित कई मांगें उठाईं
बदायूं। मानदेय में वृद्धि और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश आशा संगिनी वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष सुधा रानी के नेतृत्व में आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों ने धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों के समाधान की मांग की। उन्होंने लंबे समय से मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए शासन से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।

यूनियन का कहना है कि आशा कार्यकर्ता और आशा संगिनियां ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल, संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करने, टीकाकरण, बच्चों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को लागू कराने में उनकी अहम भागीदारी रहती है। इसके बावजूद उन्हें अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
ज्ञापन के माध्यम से यूनियन ने संविदा व्यवस्था समाप्त कर आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग उठाई। इसके अलावा न्यूनतम मानदेय 21 हजार से बढ़ाकर 26 हजार रुपये प्रतिमाह करने, विजिट भत्ता 300 रुपये से बढ़ाकर 700 रुपये करने, कार्य के लिए स्मार्टफोन उपलब्ध कराने और मोबाइल रिचार्ज भत्ता देने की मांग की गई।

कार्यकर्ताओं ने 10 लाख रुपये का दुर्घटना एवं स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि बीमारी या किसी अप्रिय घटना की स्थिति में बीमा से उन्हें और उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
धरने से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की बात
यूनियन के धरने पर बैठने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की बात कही जा रही है। इन दिनों देहात क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया और अन्य बुखार के मामले सामने आने के बीच आशा कार्यकर्ताओं की गतिविधियां प्रभावित होने से गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने, जांच कराने और समय पर उपचार संबंधी सुविधाएं प्राप्त करने में परेशानी होने की आशंका है। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर आशा कार्यकर्ताओं और संगिनियों की मांगों पर भी गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।
विधायक ने मुख्यमंत्री तक मांग पहुंचाने का दिया आश्वासन
सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता को ज्ञापन सौंपते समय कार्यकर्ताओं ने अपनी समस्याओं से अवगत कराया और शासन स्तर पर सकारात्मक निर्णय कराने की अपील की। विधायक ने मांग-पत्र को आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री के पास भेजने का आश्वासन दिया।यूनियन की जिलाध्यक्ष सुधा रानी ने कहा कि आशा कार्यकर्ता और संगिनियां स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को सफल बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं। ऐसे में उनके मानदेय में वृद्धि, राज्य कर्मचारी का दर्जा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो यूनियन आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होगी।