गंगा एक्सप्रेसवे के ग्रुप- दो में बिनावर टोल प्लाजा पर एनडीआरएफ एवं फायर विभाग के साथ संयुक्त मॉक ड्रिल का सफल आयोजन

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गंगा एक्सप्रेसवे के ग्रुप- दो में बिनावर टोल प्लाजा पर एनडीआरएफ एवं फायर विभाग के साथ संयुक्त मॉक ड्रिल का सफल आयोजन

Wednesday, 8 July 2026 | July 08, 2026 Last Updated 2026-07-09T04:14:00Z
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गंगा एक्सप्रेसवे के ग्रुप- दो में बिनावर टोल प्लाजा पर एनडीआरएफ एवं फायर विभाग के साथ संयुक्त मॉक ड्रिल का सफल आयोजन

बिनाबर संवाददाता: गंगा एक्सप्रेसवे के ग्रुप-2 अंतर्गत बिनावर टोल प्लाजा पर बुधवार को आपदा प्रबंधन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एनडीआरएफ, फायर विभाग एवं अदानी परियोजना टीम के संयुक्त तत्वावधान में एक व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया।
मॉक ड्रिल का नेतृत्व एनडीआरएफ बटालियन के कमांडेंट रविंद्र सिंह असवाल, एनडीआरएफ इंस्पेक्टर चमन किशोर गुप्ता तथा फायर स्टेशन ऑफिसर शैलेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर अडानी परियोजना की ओर से प्रोजेक्ट मैनेजर अरविंद सिंह, सिक्योरिटी एवं इंसिडेंट मैनेजर बलजीत सिंह, सेफ्टी मैनेजर राजेश कुमार मौर्य सहित परियोजना के अधिकारी एवं समस्त संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे।
मॉक ड्रिल के दौरान एक काल्पनिक आपदा परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें एक एलपीजी टैंकर की दूसरे वाहन से टक्कर हो जाने के कारण टैंकर से गैस का रिसाव शुरू हो गया तथा आग लगने जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई। इस घटना में पाँच व्यक्तियों के फँसे होने की कल्पना की गई।
सूचना प्राप्त होते ही एनडीआरएफ, फायर एवं अदानी की आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों ने निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं एसओपी के अनुसार त्वरित कार्रवाई की। एनडीआरएफ की टीम ने आवश्यक सुरक्षा उपकरणों एवं तकनीकों का उपयोग करते हुए गैस रिसाव को नियंत्रित किया तथा सभी पाँच फँसे हुए व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं फायर विभाग ने प्रभावी ढंग से स्थिति पर नियंत्रण स्थापित करते हुए आग एवं रिसाव के संभावित खतरे को समाप्त किया।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभिन्न आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव कार्यों की दक्षता का परीक्षण करना था। अभ्यास के उपरांत अधिकारियों द्वारा पूरे संचालन की समीक्षा की गई तथा भविष्य में आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक सुझाव भी दिए गए।
इस सफल संयुक्त अभ्यास ने यह सिद्ध किया कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय एवं समयबद्ध कार्रवाई से जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सकता है।