नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में पुलिस पर गंभीर सवाल, मेडिकल में एक माह की देरी का आरोप
परिजनों का आरोप—समय पर मेडिकल नहीं कराया, दुष्कर्म की धारा भी नहीं बढ़ाई; डेढ़ माह बाद आरोपी चाचा गिरफ्तार
कुंवरगांव (बदायूं)। थाना कुंवरगांव क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म के आरोप के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों ने विवेचक दरोगा पर किशोरी का समय पर मेडिकल न कराने और करीब एक माह बाद मेडिकल कराने का आरोप लगाया है। परिजनों का यह भी आरोप है कि मेडिकल में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं होने के बाद पुलिस ने मुकदमे में दुष्कर्म की धारा नहीं बढ़ाई।
परिजनों के अनुसार 27 जून को 14 वर्षीय किशोरी गांव के बाहर मक्का के खेत में भुट्टा तोड़ने गई थी। आरोप है कि इसी दौरान उसका चाचा सोनू पुत्र तोताराम निवासी चकोलर उसे मक्का के खेत में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद किशोरी ने घर पहुंचकर परिजनों को पूरी घटना बताई।
परिजनों का आरोप है कि पिता की तहरीर पर पुलिस ने शुरुआत में छेड़छाड़ की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने किशोरी का तत्काल मेडिकल नहीं कराया। परिवार का आरोप है कि आरोपी पक्ष की ओर से समझौते का दबाव बनाया जाता रहा और विवेचक ने भी मामले में कार्रवाई करने में लापरवाही बरती।
परिजनों के मुताबिक करीब एक माह बाद किशोरी का मेडिकल कराया गया। उनका आरोप है कि देरी से मेडिकल होने के कारण दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हो सकी। इसके बावजूद पुलिस ने मुकदमे में दुष्कर्म की धारा नहीं बढ़ाई, जिसको लेकर परिजनों ने उच्च अधिकारियों से शिकायत कर पुलिस की भूमिका की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
इधर, पुलिस ने मंगलवार 11 अगस्त 2026 को आरोपी सोनू पुत्र तोताराम, उम्र 21 वर्ष, निवासी चकोलर को हरनाथपुर अंडरपास के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी मुकदमे में वांछित चल रहा था। आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
अब सवाल यह है कि नाबालिग के मामले में मेडिकल कराने में कथित रूप से एक माह की देरी क्यों हुई और विवेचना के दौरान पुलिस ने किन परिस्थितियों में दुष्कर्म की धारा नहीं बढ़ाई? परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
