बदायूं की डॉ. ममता नौगरैया ने रचा साहित्य का नया इतिहास, 300 से अधिक सम्मानों और 120 से ज्यादा पुस्तकों से बढ़ाया प्रदेश का गौरव
*गृहस्थी की जिम्मेदारियों के साथ हासिल की डॉक्टरेट की उपाधि, साहित्य, पर्यावरण और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में देशभर में बनाई अ* लग पहचान
बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं की वरिष्ठ साहित्यकार एवं पर्यावरणविद् डॉ. ममता नौगरैया आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर परिश्रम के बल पर गृहस्थी संभालते हुए भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाई जा सकती है। उन्होंने न केवल डॉक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि प्राप्त की, बल्कि साहित्य के क्षेत्र में सैकड़ों रचनाओं और 120से अधिक प्रकाशित पुस्तकों के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।
डॉ. ममता नौगरैया को देश-विदेश की प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा अब तक 300 से अधिक साहित्यिक एवं सामाजिक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनके लेख, कविताएं, कहानियां और शोधपरक रचनाएं विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रही हैं। हिंदी साहित्य के प्रति उनका समर्पण उन्हें समकालीन साहित्यकारों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करता है।
मध्य प्रदेश के सतना की मूल निवासी डॉ. ममता नौगरैया वर्तमान में बदायूं में निवास करती हैं। वह वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरेश चंद्र नौगरैया की धर्मपत्नी हैं तथा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के परिवार से भी उनका पारिवारिक संबंध रहा है। साहित्य, संस्कृति और भारतीय परंपराओं के संरक्षण को लेकर उनका योगदान विशेष रूप से सराहा जाता है।
साहित्य और समाज सेवा में समान योगदान
डॉ. ममता नौगरैया प्रकृति मंथन तथा समकालीन महिला साहित्य संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष अ.भा.वैश्य समाज की अध्यक्ष ,सर्व समाज की अध्यक्ष , अ.सेवा दल राजस्थान की मार्गदर्शक,आदि संस्थाओ के पद के रूप में देशभर की महिला साहित्यकारों को एक मंच प्रदान कर रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।
'वृक्ष रत्न सम्मान' से हुईं सम्मानित
स्वदेशी समाज सेवा समिति के स्थापना दिवस पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह में डॉ. ममता नौगरैया को 'वृक्ष रत्न सम्मान' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान देश के उन चुनिंदा व्यक्तित्वों को प्रदान किया गया जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। इस अवसर पर उन्हें सम्मान राशि भी प्रदान की गई।
बुंदेलखंड की संस्कृति को शब्दों में किया जीवंत
डॉ. नौगरैया की साहित्यिक कृतियों में भारतीय संस्कृति, नारी जीवन, सामाजिक सरोकार और बुंदेलखंड की लोक परंपराओं का जीवंत चित्रण देखने को मिलता है। उनकी पुस्तक 'बुंदेलखंड का इतिहास' क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और लोकजीवन पर आधारित महत्वपूर्ण कृति मानी जा रही है।
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणास्रोत
गृहस्थी की जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान बनाना डॉ. ममता नौगरैया की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि यदि संकल्प मजबूत हो तो पारिवारिक दायित्व सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। आज उनका जीवन हजारों महिलाओं और युवा साहित्यकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
डॉ. ममता नौगरैया की उपलब्धियां केवल बदायूं या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अपने साहित्य, समाज सेवा ममता सेवी संस्था सरकारी योजनाओ का कार्य बखूबी संस्था के सदस्यो के मिल जुलकर ग्रामीणो को लाभांवित कर रही है और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों से पूरे देश में उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।
