सावन माह में कांवड़ यात्रा से गंगाजल लेकर लौटे भाजपा नेता डॉ. शैलेश पाठक का शहर में जोरदार और भव्य स्वागत किया गया।

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सावन माह में कांवड़ यात्रा से गंगाजल लेकर लौटे भाजपा नेता डॉ. शैलेश पाठक का शहर में जोरदार और भव्य स्वागत किया गया।

Sunday, 9 August 2026 | August 09, 2026 Last Updated 2026-08-09T12:45:27Z
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दातागंज। सावन माह में कांवड़ यात्रा से गंगाजल लेकर लौटे भाजपा नेता डॉ. शैलेश पाठक का शहर में जोरदार और भव्य स्वागत किया गया। शहर में प्रवेश करते ही समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया। डीजे की धुनों और जयकारों के बीच निकले स्वागत जुलूस ने पूरे माहौल को भक्तिमय और उत्सवी बना दिया। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने गले मिलकर उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनकी इस धार्मिक यात्रा को ऐतिहासिक बताया।



प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव ने अपने आवास के सामने डॉ. शैलेश पाठक का विशेष स्वागत किया। उन्होंने फूल-मालाओं से लादकर उनका अभिनंदन किया और कहा कि इतना विशाल जनसमूह किसी भी नेता के साथ बहुत कम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि यह जनसमर्थन डॉ. पाठक की लोकप्रियता और क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है।



बताया जा रहा है कि डॉ. शैलेश पाठक इस बार कांवड़ यात्रा में करीब 25 हजार से अधिक ग्रामीणों को साथ लेकर गए थे। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इस यात्रा को खास बना दिया। यात्रा के दौरान अनुशासन, व्यवस्थाओं और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे यह आयोजन क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।



स्वागत कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने कहा कि डॉ. पाठक लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनता के बीच काम कर रहे हैं। यही कारण है कि उनका जनाधार तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अब केवल एक नेता नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के मसीहा बनकर उभर रहे हैं।



राजनीतिक दृष्टि से भी इस आयोजन को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते जनसमर्थन को देखकर विरोधियों के भी होश उड़ गए हैं। कई लोगों ने यह भी कहा कि अगर भाजपा नेतृत्व ने डॉ. शैलेश पाठक पर भरोसा जताया, तो उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।



कार्यक्रम में डॉ. पाठक के परिवार की भी चर्चा रही। उनकी बेटी शिप्रा पाठक, जो ‘वाटर वूमेन’ के नाम से देश-विदेश में पहचान बना चुकी हैं, का नाम भी लोगों की जुबान पर रहा। सामाजिक कार्यों और जल संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना करते हुए लोगों ने कहा कि परिवार की यह छवि भी डॉ. पाठक की लोकप्रियता को मजबूती देती है।



इसके साथ ही यह भी चर्चा रही कि शिप्रा पाठक की संघ में मजबूत पकड़ है, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर भी प्रभाव पड़ रहा है। इस कारण विरोधी खेमे में भी हलचल देखी जा रही है।



समूचे कार्यक्रम में उत्साह और ऊर्जा का माहौल देखने को मिला। डीजे की धुनों पर झूमते कार्यकर्ता, फूलों की बारिश और जयकारों से गूंजता शहर, इस स्वागत को यादगार बना गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि आने वाले समय के राजनीतिक संकेत भी देता नजर आया।