राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से बदल रही शिक्षा की तस्वीर, विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर मंथन।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से बदल रही शिक्षा की तस्वीर, विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर मंथन।

Tuesday, 25 August 2026 | August 25, 2026 Last Updated 2026-08-26T03:32:55Z
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से बदल रही शिक्षा की तस्वीर, विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर मंथन।


सितारगंज:(चरनसिंह सरारी) राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सितारगंज में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के छह वर्ष: क्रियान्वयन, चुनौतियां एवं विकसित भारत की संकल्पना’ विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों, इसके क्रियान्वयन से शिक्षा के क्षेत्र में आए बदलावों, विद्यार्थियों के सामने मौजूद अवसरों एवं चुनौतियों तथा विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का शुभारंभ समारोहक डॉ. दीक्षा खम्पा द्वारा अतिथियों एवं प्रतिभागियों के परिचय से किया गया। इसके बाद अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. दीपा माखोलिया ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उनके ज्ञान, कौशल, रचनात्मकता, व्यक्तित्व विकास और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर बल देती है। उन्होंने विद्यार्थियों के जीवन के लक्ष्यों को निर्धारित करने और उन्हें सही दिशा प्रदान करने में NEP-2020 की भूमिका को भी रेखांकित किया। विशिष्ट वक्ता डॉ. अभिमन्यु कुमार ने भारत में शिक्षा के विकास की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए स्वतंत्रता के बाद लागू की गई विभिन्न शिक्षा नीतियों की जानकारी दी। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शामिल नए आयामों और बदलते समय के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों को विस्तार से समझाया। मुख्य वक्ता डॉ. नवल किशोर लोहनी ने पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न बिंदुओं, इसके लक्ष्यों, अकादमिक क्रेडिट प्रणाली तथा विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध शैक्षिक विकल्पों की जानकारी बेहद सरल एवं प्रभावी तरीके से दी। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप विषयों का चयन करने, विभिन्न क्षेत्रों में ज्ञान अर्जित करने और उच्च शिक्षा के दौरान अपने कौशल को विकसित करने के अधिक अवसर प्रदान करती है। वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी दक्षता के माध्यम से युवा पीढ़ी को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सकता है, जो विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण आधार बनेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रेनू रानी बंसल ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को वर्तमान शैक्षिक एवं सामाजिक परिवेश के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की मजबूत नींव होती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ उनके अंदर नेतृत्व क्षमता, नवाचार की सोच, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मुख्य वक्ता, विशिष्ट वक्ता, नोडल अधिकारी, समारोहक, महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया। व्याख्यान के उपरांत डॉ. जगदीश प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में डॉ. दीपा माखोलिया, डॉ. जगदीश प्रसाद, डॉ. चंद्रा खाती, डॉ. संजय टम्टा, डॉ. दुर्गा तिवारी, डॉ. कामना, डॉ. प्रज्ञा, मुख्य वक्ता डॉ. नवल किशोर लोहनी सहित महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विशेष व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं को समझने के साथ ही उच्च शिक्षा में उपलब्ध नए अवसरों और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी हासिल की। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में नई शिक्षा व्यवस्था को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ ही शिक्षा, कौशल और नवाचार के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में युवा शक्ति की भूमिका को भी प्रभावी ढंग से सामने रखा।